नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में सबसे लंबे समय तक पद पर बने रहने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। इस उपलब्धि के बाद राजनीतिक गलियारों में उनकी विरासत, लोकप्रियता और देश की राजनीति पर उनके प्रभाव को लेकर चर्चा तेज हो गई है। इंडिया टीवी के लोकप्रिय शो 'कॉफी पर कुरुक्षेत्र' में शो के एंकर और गेस्ट ने पीएम मोदी के नेतृत्व, चुनावी प्रभाव और राष्ट्रीय राजनीति में उनके योगदान पर विस्तार से चर्चा की। कार्यक्रम में शो के एंकर और इंडिया टीवी के सीनियर एग्जिक्यूटिव एडिटर सौरव शर्मा, पॉलिटिकल एडिटर देवेंद्र पाराशर के साथ-साथ गेस्ट के रूप में मनोज कुमार सिंह और अमिताभ तिवारी मौजूद रहे।
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बंगाल को बताया मोदी की राजनीतिक विरासत का बड़ा अध्याय
चर्चा के दौरान पश्चिम बंगाल की राजनीति का विशेष रूप से जिक्र हुआ। वक्ताओं का कहना था कि भाजपा ने राज्य में अपना विस्तार प्रधानमंत्री मोदी के चेहरे पर किया और आज तृणमूल कांग्रेस के भीतर दिखाई दे रही हलचल को भी उसी राजनीतिक बदलाव का हिस्सा माना जा रहा है। कुछ विश्लेषकों ने यहां तक कहा कि मौजूदा समय में मोदी की राजनीतिक विरासत में बंगाल का स्थान सबसे ऊपर माना जा सकता है।
2014 के बाद बढ़ा NDA का दायरा
चर्चा में आंकड़ों के जरिए बताया गया कि 2014 के बाद भाजपा और एनडीए का राजनीतिक विस्तार लगातार बढ़ा है। चर्चा में कहा गया कि 2014 में एनडीए शासित राज्यों में देश की करीब 28 प्रतिशत आबादी रहती थी, जबकि अब यह आंकड़ा 70 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। इसी तरह भाजपा विधायकों की संख्या में भी बड़ी बढ़ोतरी का दावा किया गया।
‘सुपर सीएम फेस’ के तौर पर उभरे मोदी
राज्यों के चुनावों में मोदी की भूमिका पर चर्चा करते हुए वक्ताओं ने कहा कि 2014 के बाद कई ऐसे राज्यों में भाजपा सरकार बनाने में सफल रही, जहां पहले पार्टी तीसरे या चौथे स्थान पर हुआ करती थी। हरियाणा, महाराष्ट्र, असम और ओडिशा जैसे राज्यों का जिक्र करते हुए कहा गया कि इन चुनावों में मोदी एक तरह से “सुपर सीएम फेस” की भूमिका में नजर आए।
चुनावों में कितना बड़ा है ‘मोदी फैक्टर’?
कार्यक्रम में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को मिले वोटों का एक बड़ा हिस्सा सीधे प्रधानमंत्री मोदी के नाम से जुड़ा था। विश्लेषकों का दावा था कि भाजपा को मिले कुल वोटों में लगभग 25 प्रतिशत वोट ऐसे थे, जो व्यक्तिगत रूप से मोदी के प्रभाव के कारण पार्टी को मिले। इसी आधार पर उन्हें चुनावों का सबसे बड़ा “डिफरेंशिएटिंग फैक्टर” बताया गया।
लोकप्रियता बरकरार रखने की क्षमता पर चर्चा
विशेषज्ञों ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता में कुछ उतार-चढ़ाव जरूर आए, लेकिन चुनावों के समय उनका जनाधार लगातार मजबूत दिखाई दिया। इसे उनकी लोगों से जुड़ने की क्षमता, मजबूत फीडबैक सिस्टम और समय-समय पर खुद को नए रूप में प्रस्तुत करने की रणनीति का परिणाम बताया गया।
योजनाओं और विकास कार्यों का भी हुआ उल्लेख
चर्चा के दौरान जनधन खाते, स्वास्थ्य बीमा, उज्ज्वला योजना, मुफ्त राशन, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण, सड़क और हवाई अड्डा नेटवर्क के विस्तार, बिजली उत्पादन क्षमता और रक्षा निर्यात जैसे विषयों का उल्लेख किया गया। वक्ताओं ने इन पहलुओं को मोदी सरकार की प्रमुख उपलब्धियों के तौर पर पेश किया।
वैश्विक मंच पर बढ़ी भारत की पहचान
कार्यक्रम में यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयन के बधाई संदेश का भी उल्लेख हुआ। वक्ताओं ने कहा कि मोदी के नेतृत्व में भारत की अंतरराष्ट्रीय पहचान मजबूत हुई है और दुनिया के कई देशों के नेताओं ने इस उपलब्धि पर उन्हें शुभकामनाएं दी हैं।
सहयोगी दलों ने भी जताया भरोसा
एनडीए के सहयोगी दलों के नेताओं ने भी प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की सराहना की। वक्ताओं ने कहा कि गठबंधन सरकार होने के बावजूद नेतृत्व शैली और निर्णय लेने की क्षमता में कोई बदलाव दिखाई नहीं दिया। सहयोगी दलों के साथ बेहतर तालमेल को भी मोदी की राजनीतिक क्षमता का हिस्सा बताया गया।
आगे भी बन सकते हैं नए रिकॉर्ड
चर्चा के अंत में विशेषज्ञों ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नाम पहले ही कई राजनीतिक रिकॉर्ड दर्ज हो चुके हैं और आने वाले वर्षों में उनकी सरकार कुछ और बड़े फैसले तथा नए कीर्तिमान स्थापित कर सकती है। साथ ही यह भी माना गया कि भारतीय राजनीति में आने वाले समय में मोदी समर्थक और मोदी विरोधी राजनीति के बीच मुकाबला और अधिक स्पष्ट हो सकता है।
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(डिस्क्लेमरः यह आर्टिकल कार्यक्रम में हुई चर्चा पर आधारित है और कार्यक्रम के दौरान व्यक्त किए गए विचार मेहमानों के निजी विचार हैं।)